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mahabharat 1.161.24: जो क्षत्रिय इस पृथ्वी पर वैश्य को उसके कार्य में सहायता करता है, वही निश्चय ही समस्त लोकों में प्रजा को प्रसन्न करने वाला राजा होता है ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 1.161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.161.24 
वैश्यस्यार्थे च साहाय्यं कुर्वाण: क्षत्रियो भुवि।
स सर्वेष्वपि लोकेषु प्रजा रञ्जयते ध्रुवम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जो क्षत्रिय इस पृथ्वी पर वैश्य को उसके कार्य में सहायता करता है, वही निश्चय ही समस्त लोकों में प्रजा को प्रसन्न करने वाला राजा होता है ॥24॥
 
The Kshatriya who helps the Vaishya in his work on this earth is certainly the king who pleases the people in all the worlds. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)