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mahabharat 1.161.23: यदि कोई क्षत्रिय किसी अन्य क्षत्रिय को प्राण संकट से बचाता है, तो वह इस लोक में तथा परलोक में भी महान यश प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 1.161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.161.23 
क्षत्रियस्यैव कुर्वाण: क्षत्रियो वधमोक्षणम्।
विपुलां कीर्तिमाप्नोति लोकेऽस्मिंश्च परत्र च॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई क्षत्रिय किसी अन्य क्षत्रिय को प्राण संकट से बचाता है, तो वह इस लोक में तथा परलोक में भी महान यश प्राप्त करता है।
 
If a Kshatriya saves another Kshatriya from a life-threatening situation, he achieves great fame in this world as well as the next. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)