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mahabharat 1.161.22: जो क्षत्रिय ब्राह्मण को उसके कार्य में सहायता करता है, वह परम लोकों को प्राप्त करता है - ऐसा मेरा विश्वास है ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 1.161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.161.22 
यो ब्राह्मणस्य साहाय्यं कुर्यादर्थेषु कर्हिचित्।
क्षत्रिय: स शुभाँल्लोकानाप्नुयादिति मे मति:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो क्षत्रिय ब्राह्मण को उसके कार्य में सहायता करता है, वह परम लोकों को प्राप्त करता है - ऐसा मेरा विश्वास है ॥22॥
 
A Kshatriya who ever helps a Brahmin in his work, attains the highest worlds - this is my belief. ॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)