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mahabharat 1.161.20: मैंने ऐसा लोभ, अज्ञान या आसक्ति के कारण नहीं सोचा है; अपितु अपनी बुद्धि से सावधानीपूर्वक विचार करने के पश्चात् मैंने शुद्ध धर्म के अनुरूप निर्णय लिया है।   |   mahabharat अध्याय 1.161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.161.20 
नेदं लोभान्न चाज्ञानान्न च मोहाद् विनिश्चितम्।
बुद्धिपूर्वं तु धर्मस्य व्यवसाय: कृतो मया॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मैंने ऐसा लोभ, अज्ञान या आसक्ति के कारण नहीं सोचा है; अपितु अपनी बुद्धि से सावधानीपूर्वक विचार करने के पश्चात् मैंने शुद्ध धर्म के अनुरूप निर्णय लिया है।
 
I have not thought so out of greed, ignorance or attachment; rather, after careful consideration with my intellect, I have made a decision that is in accordance with pure Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)