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mahabharat 1.161.15: जो कोई किसी पर उपकार करे, उसे उससे कई गुना अधिक उपकार करना चाहिए। उस दिन मैंने लाक्षागृह में भीमसेन का महान पराक्रम देखा और हिडिम्बा का वध भी मेरी आँखों के सामने हुआ। इससे मुझे भीमसेन पर पूर्ण विश्वास हो गया है॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 1.161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.161.15 
यावच्च कुर्यादन्योऽस्य कुर्याद् बहुगुणं तत:।
दृष्ट्वा भीमस्य विक्रान्तं तदा जतुगृहे महत्।
हिडिम्बस्य वधाच्चैवं विश्वासो मे वृकोदरे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो कोई किसी पर उपकार करे, उसे उससे कई गुना अधिक उपकार करना चाहिए। उस दिन मैंने लाक्षागृह में भीमसेन का महान पराक्रम देखा और हिडिम्बा का वध भी मेरी आँखों के सामने हुआ। इससे मुझे भीमसेन पर पूर्ण विश्वास हो गया है॥ 15॥
 
Whatever favours another person may do to him, he should reciprocate many times more than that. That day I saw the great valour of Bhimasena in Lakhshagriha and the incident of killing of Hidimba also took place in front of my eyes. This has given me complete faith in Bhimasena.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)