गुरुणा चाननुज्ञातो ग्राहयेद् यत् सुतो मम।
न स कुर्यात् तथा कार्यं विद्ययेति सतां मतम्॥ १८॥
अनुवाद
और यदि मेरा पुत्र गुरु की आज्ञा लिए बिना किसी को अपना मन्त्र सिखा दे, तो वह व्यक्ति जो उसे सीखता है, उस मन्त्र से वैसा ही कार्य नहीं कर सकेगा जैसा मेरा पुत्र करता है। इस विषय में संतों का यही मत है॥18॥
And if my son teaches his mantra to someone without taking the permission of his Guru, then that person who learns it will not be able to do the same work with that mantra as my son does. This is the opinion of the saints in this matter.॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥