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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 16: कद्रू और विनताको कश्यपजीके वरदानसे अभीष्ट पुत्रोंकी प्राप्ति
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श्लोक 4
श्लोक
1.16.4
सौतिरुवाच
आयुष्मन्निदमाख्यानमास्तीकं कथयामि ते।
यथाश्रुतं कथयत: सकाशाद् वै पितुर्मया॥ ४॥
अनुवाद
उग्रश्रवाजी बोले- आयुष्मान्! मैं तुमसे यह आस्तिक कथा उसी रूप में कहता हूँ, जिस रूप में मैंने इसे अपने कथावाचक पिता से सुना है॥4॥
Ugrashravaji said- Ayushman! I tell you this story of Aastik to you in the same form as I have heard it from my narrator father. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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