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mahabharat 1.16.3: तुम्हारे पिता सदैव हमारी सेवा में लगे रहते थे। जिस प्रकार उन्होंने यह कथा कही है, उसी प्रकार तुम भी यह कथा कहो॥3॥   |   mahabharat अध्याय 1.16: कद्रू और विनताको कश्यपजीके वरदानसे अभीष्ट पुत्रोंकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 16: कद्रू और विनताको कश्यपजीके वरदानसे अभीष्ट पुत्रोंकी प्राप्ति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.16.3 
अस्मच्छुश्रूषणे नित्यं पिता हि निरतस्तव।
आचष्टैतद् यथाख्यानं पिता ते त्वं तथा वद॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे पिता सदैव हमारी सेवा में लगे रहते थे। जिस प्रकार उन्होंने यह कथा कही है, उसी प्रकार तुम भी यह कथा कहो॥3॥
 
Your father was always engaged in serving us. You should narrate this anecdote in the same manner in which he has narrated it. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)