Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.16.24-25: तत्पश्चात्, जब समय पूरा हो गया, तो सर्पों का संहार करने वाले गरुड़ का जन्म हुआ। हे भृगुश्रेष्ठ! पक्षी के जन्म लेते ही गरुड़ को भूख लगी और वे अपनी माता विनता को छोड़कर उस भोजन को लाने के लिए आकाश में उड़ चले, जिसकी व्यवस्था विधाता ने उनके लिए की थी। | mahabharat अध्याय 1.16: कद्रू और विनताको कश्यपजीके वरदानसे अभीष्ट पुत्रोंकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात्, जब समय पूरा हो गया, तो सर्पों का संहार करने वाले गरुड़ का जन्म हुआ। हे भृगुश्रेष्ठ! पक्षी के जन्म लेते ही गरुड़ को भूख लगी और वे अपनी माता विनता को छोड़कर उस भोजन को लाने के लिए आकाश में उड़ चले, जिसकी व्यवस्था विधाता ने उनके लिए की थी।
Thereafter, when the time was over, the snake-killer Garuda was born. O best of Bhrigu! As soon as the bird was born, Garuda became hungry and left his mother Vinata and flew into the sky to get the food that the Creator had arranged for him.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सर्पादीनामुत्पत्तौ षोडशोऽध्याय:॥ १६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें सर्प आदिकी उत्पत्तिसे सम्बन्ध रखनेवाला सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥