एष च त्वां सुतो मातर्दासीत्वान्मोचयिष्यति।
यद्येनमपि मातस्त्वं मामिवाण्डविभेदनात्॥ २०॥
न करिष्यस्यनङ्गं वा व्यङ्गं वापि तपस्विनम्।
अनुवाद
‘और माँ! दूसरे अण्डे में तुम्हारा यह पुत्र तुम्हें दासत्व के बंधन से मुक्त कर देगा; परन्तु माँ! यह तभी हो सकता है, जब तुम मेरी भाँति अण्डे को फोड़कर इस तपस्वी पुत्र को अंगहीन या अपूर्ण अंगों वाला न बनाओ॥20 1/2॥
‘And mother! This son of yours in the second egg will free you from the bondage of slavery; but mother! This can happen only when you do not make this ascetic son limbless or with incomplete limbs by breaking the egg like I did.॥ 20 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥