श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 16: कद्रू और विनताको कश्यपजीके वरदानसे अभीष्ट पुत्रोंकी प्राप्ति  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  1.16.13-14h 
सौतिरुवाच
कालेन महता कद्रूरण्डानां दशतीर्दश॥ १३॥
जनयामास विप्रेन्द्र द्वे चाण्डे विनता तदा।
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी बोले - ब्रह्मन् ! तत्पश्चात् बहुत काल के पश्चात् कद्रू ने एक हजार अण्डे और दिए तथा विनता के कहने पर दो अण्डे दिए ॥13॥
 
Ugrashravaji said – Brahmin! Thereafter, after a long time, Kadru laid one thousand more eggs and two eggs at Vinata's request. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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