Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.16.12-13h: अपने समान तेजस्वी एक हजार पुत्रों का वरदान पाकर कद्रू ने भी सोचा कि मेरी मनोकामना पूर्ण हो गई। वरदान से संतुष्ट होकर अपनी पत्नियों से ऐसा कहकर कि 'तुम दोनों पूरी तत्परता से अपने-अपने गर्भ की रक्षा करो', महातपस्वी कश्यपजी वन को चले गए॥12॥ | mahabharat अध्याय 1.16: कद्रू और विनताको कश्यपजीके वरदानसे अभीष्ट पुत्रोंकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कद्रूश्च लब्ध्वा पुत्राणां सहस्रं तुल्यवर्चसाम्।
धार्यौ प्रयत्नतो गर्भावित्युक्त्वा स महातपा:॥ १२॥
ते भार्ये वरसंतुष्टे कश्यपो वनमाविशत्।
अनुवाद
अपने समान तेजस्वी एक हजार पुत्रों का वरदान पाकर कद्रू ने भी सोचा कि मेरी मनोकामना पूर्ण हो गई। वरदान से संतुष्ट होकर अपनी पत्नियों से ऐसा कहकर कि 'तुम दोनों पूरी तत्परता से अपने-अपने गर्भ की रक्षा करो', महातपस्वी कश्यपजी वन को चले गए॥12॥
Having received the boon of having a thousand sons as radiant as him, Kadru also thought that her wish had been fulfilled. Satisfied with the boon, saying to his wives that 'you both should protect your respective wombs with all diligence', the great ascetic Kashyapji went to the forest.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥