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mahabharat 1.159.9: वास्तव में यहाँ का राजा वेत्रकीयगृह नामक स्थान पर रहता है। परन्तु वह न्याय के मार्ग पर नहीं चलता। बहुत प्रयत्न करने पर भी वह मंदबुद्धि राजा ऐसा कोई उपाय नहीं करता जिससे उसकी प्रजा के कष्ट सदा के लिए समाप्त हो जाएँ।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.159: कुन्तीके पूछनेपर ब्राह्मणका उनसे अपने दु:खका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 159: कुन्तीके पूछनेपर ब्राह्मणका उनसे अपने दु:खका कारण बताना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.159.9 
वेत्रकीयगृहे राजा नायं नयमिहास्थित:।
उपायं तं न कुरुते यत्नादपि स मन्दधी:।
अनामयं जनस्यास्य येन स्यादद्य शाश्वतम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वास्तव में यहाँ का राजा वेत्रकीयगृह नामक स्थान पर रहता है। परन्तु वह न्याय के मार्ग पर नहीं चलता। बहुत प्रयत्न करने पर भी वह मंदबुद्धि राजा ऐसा कोई उपाय नहीं करता जिससे उसकी प्रजा के कष्ट सदा के लिए समाप्त हो जाएँ।॥9॥
 
In reality, the king here lives in a place called Vetrakiyagriha. But he does not follow the path of justice. Even though he tries hard, that dull-witted king does not take any such measures which can end the problems of his subjects forever.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)