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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 159: कुन्तीके पूछनेपर ब्राह्मणका उनसे अपने दु:खका कारण बताना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.159.7 
एकैकश्चापि पुरुषस्तत् प्रयच्छति भोजनम्।
स वारो बहुभिर्वर्षैर्भवत्यसुकरो नरै:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हर गृहस्थ अपनी बारी आने पर उसे भोजन देता है। हालाँकि यह बारी कई वर्षों के बाद आती है, लेकिन लोगों के लिए इसे पूरा करना बहुत कठिन होता है।
 
Every householder gives him food when his turn comes. Although this turn comes after many years, it is very difficult for people to fulfill it. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)