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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 159: कुन्तीके पूछनेपर ब्राह्मणका उनसे अपने दु:खका कारण बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.159.2 
ब्राह्मण उवाच
उपपन्नं सतामेतद् यद् ब्रवीषि तपोधने।
न तु दु:खमिदं शक्यं मानुषेण व्यपोहितुम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने कहा, "हे तपस्वी! आप जो कुछ कह रहे हैं, वह आप जैसे सज्जनों के लिए उचित है; परंतु कोई भी मनुष्य हमारा दुःख दूर नहीं कर सकता।"
 
The Brahmin said, "O ascetic! Whatever you are saying is appropriate for gentlemen like you; but no human being can remove our suffering."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)