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mahabharat 1.159.15: मेरे पास कहीं से भी किसी मनुष्य को खरीदने के लिए धन नहीं है। मैं अपने मित्रों और सम्बन्धियों को भी उस राक्षस को कभी नहीं सौंप सकूँगा।॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.159: कुन्तीके पूछनेपर ब्राह्मणका उनसे अपने दु:खका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 159: कुन्तीके पूछनेपर ब्राह्मणका उनसे अपने दु:खका कारण बताना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.159.15 
न च मे विद्यते वित्तं संक्रेतुं पुरुषं क्वचित्।
सुहृज्जनं प्रदातुं च न शक्ष्यामि कदाचन॥ १५॥
 
 
अनुवाद
मेरे पास कहीं से भी किसी मनुष्य को खरीदने के लिए धन नहीं है। मैं अपने मित्रों और सम्बन्धियों को भी उस राक्षस को कभी नहीं सौंप सकूँगा।॥15॥
 
I do not have the money to buy any man from anywhere. I will never be able to hand over my friends and relatives to that demon.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)