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mahabharat 1.159.13: ये तीनों वस्तुएँ मैंने गलत रीति से अर्जित की हैं (अर्थात दुष्ट राजा के राज्य में रहा, दुष्ट राज्य में विवाह किया और विवाह के बाद कुछ भी धन नहीं कमाया); इसलिए हम लोग इस विपत्ति में बहुत दुःख भोग रहे हैं॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.159: कुन्तीके पूछनेपर ब्राह्मणका उनसे अपने दु:खका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 159: कुन्तीके पूछनेपर ब्राह्मणका उनसे अपने दु:खका कारण बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.159.13 
विपरीतं मया चेदं त्रयं सर्वमुपार्जितम्।
तदिमामापदं प्राप्य भृशं तप्यामहे वयम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
ये तीनों वस्तुएँ मैंने गलत रीति से अर्जित की हैं (अर्थात दुष्ट राजा के राज्य में रहा, दुष्ट राज्य में विवाह किया और विवाह के बाद कुछ भी धन नहीं कमाया); इसलिए हम लोग इस विपत्ति में बहुत दुःख भोग रहे हैं॥13॥
 
I have earned these three things in the wrong way (i.e. lived in the kingdom of an evil king, married in a bad kingdom and did not earn any money after marriage); therefore, we are suffering a lot in this calamity.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)