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mahabharat 1.159.11: ब्राह्मणों को कौन आज्ञा दे सकता है, अथवा वे किसके अधीन रह सकते हैं? जैसे पक्षी अपनी इच्छा से विचरण करते हैं, वैसे ही वे देश या राजा के गुणों के अनुसार कहीं भी रहते हैं ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.159: कुन्तीके पूछनेपर ब्राह्मणका उनसे अपने दु:खका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 159: कुन्तीके पूछनेपर ब्राह्मणका उनसे अपने दु:खका कारण बताना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.159.11 
ब्राह्मणा: कस्य वक्तव्या: कस्य वाच्छन्दचारिण:।
गुणैरेते हि वत्स्यन्ति कामगा: पक्षिणो यथा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों को कौन आज्ञा दे सकता है, अथवा वे किसके अधीन रह सकते हैं? जैसे पक्षी अपनी इच्छा से विचरण करते हैं, वैसे ही वे देश या राजा के गुणों के अनुसार कहीं भी रहते हैं ॥11॥
 
Who can command the brahmanas or under whose control they can live? Like birds that move about at will, they live anywhere depending on the qualities of the country or the king. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)