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mahabharat 1.159.1: कुन्ती ने पूछा - हे ब्रह्मन्! आपके दुःख का कारण क्या है? मैं इसे ठीक-ठीक जानना चाहती हूँ। यदि इसे जानने से इसका निवारण हो सके, तो मैं ऐसा करने का प्रयत्न करूँगी।॥1॥   |   mahabharat अध्याय 1.159: कुन्तीके पूछनेपर ब्राह्मणका उनसे अपने दु:खका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 159: कुन्तीके पूछनेपर ब्राह्मणका उनसे अपने दु:खका कारण बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  1.159.1 
कुन्त्युवाच
कुतोमूलमिदं दु:खं ज्ञातुमिच्छामि तत्त्वत:।
विदित्वाप्यपकर्षेयं शक्यं चेदपकर्षितुम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
कुन्ती ने पूछा - हे ब्रह्मन्! आपके दुःख का कारण क्या है? मैं इसे ठीक-ठीक जानना चाहती हूँ। यदि इसे जानने से इसका निवारण हो सके, तो मैं ऐसा करने का प्रयत्न करूँगी।॥1॥
 
Kunti asked - O Brahman! What is the reason for your suffering? I want to know this exactly. If it can be removed by knowing it, I will try to do so.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)