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mahabharat 1.158.23: यद्यपि वे सब शोक में डूबे हुए थे, तथापि बालक की अस्पष्ट बाल-वाणी सुनकर उनके हृदय में सहसा अपार प्रसन्नता की लहर दौड़ गई॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 1.158: ब्राह्मण-कन्याके त्याग और विवेकपूर्ण वचन तथा कुन्तीका उन सबके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 158: ब्राह्मण-कन्याके त्याग और विवेकपूर्ण वचन तथा कुन्तीका उन सबके पास जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.158.23 
तथापि तेषां दु:खेन परीतानां निशम्य तत्।
बालस्य वाक्यमव्यक्तं हर्ष: समभवन्महान्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि वे सब शोक में डूबे हुए थे, तथापि बालक की अस्पष्ट बाल-वाणी सुनकर उनके हृदय में सहसा अपार प्रसन्नता की लहर दौड़ गई॥ 23॥
 
Although they were all immersed in sorrow, yet on hearing the child's unclear childish speech a wave of immense happiness suddenly ran through their hearts.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)