Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.158.11: 'कहा जाता है कि पुत्र अपनी आत्मा है और पत्नी मित्र है; किन्तु पुत्री तो विपत्ति है। अतः आप इस विपत्ति से स्वयं को बचाएँ और मुझे भी धर्म में लगाएँ॥ 11॥ | mahabharat अध्याय 1.158: ब्राह्मण-कन्याके त्याग और विवेकपूर्ण वचन तथा कुन्तीका उन सबके पास जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आत्मा पुत्र: सखा भार्या कृच्छ्रं तु दुहिता किल।
स कृच्छ्रान्मोचयात्मानं मां च धर्मे नियोजय॥ ११॥
अनुवाद
'कहा जाता है कि पुत्र अपनी आत्मा है और पत्नी मित्र है; किन्तु पुत्री तो विपत्ति है। अतः आप इस विपत्ति से स्वयं को बचाएँ और मुझे भी धर्म में लगाएँ॥ 11॥
'It is said that a son is one's own soul and a wife is a friend; but a daughter is certainly a calamity. So please save yourself from this calamity and also engage me in Dharma.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥