Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.158.10: यदि तुम मृत्यु के भय से मुक्त होकर स्वस्थ रहोगे, तो मेरी माता, मेरा छोटा भाई, संतानों का वंश और पिण्ड (श्राद्ध) - ये सब स्थिर रहेंगे; इसमें संशय नहीं है॥ 10॥ | mahabharat अध्याय 1.158: ब्राह्मण-कन्याके त्याग और विवेकपूर्ण वचन तथा कुन्तीका उन सबके पास जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वयि त्वरोगे निर्मुक्ते माता भ्राता च मे शिशु:।
संतानश्चैव पिण्डश्च प्रतिष्ठास्यत्यसंशयम्॥ १०॥
अनुवाद
यदि तुम मृत्यु के भय से मुक्त होकर स्वस्थ रहोगे, तो मेरी माता, मेरा छोटा भाई, संतानों का वंश और पिण्ड (श्राद्ध) - ये सब स्थिर रहेंगे; इसमें संशय नहीं है॥ 10॥
"If you remain free from the danger of death and remain healthy, then my mother, my little brother, the lineage of children and the 'Pinda' (Shraddha ceremony) - all these will remain stable; there is no doubt about this.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥