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mahabharat 1.157.d1: पिता, माता और पुत्र-सभी सीमित मात्रा में सुख देते हैं, केवल पति ही असीम सुख देता है। ऐसे पति का कौन स्त्री आदर नहीं करेगी?   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  1.157.d1 
(मितं ददाति हि पिता मितं माता मितं सुत:।
अमितस्य हि दातारं का पतिं नाभिनन्दति॥ )
 
 
अनुवाद
पिता, माता और पुत्र-सभी सीमित मात्रा में सुख देते हैं, केवल पति ही असीम सुख देता है। ऐसे पति का कौन स्त्री आदर नहीं करेगी?
 
Father, mother and son-all give happiness in limited quantity, only the husband gives unlimited happiness. Which woman will not respect such a husband?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)