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mahabharat 1.157.7: जिस उद्देश्य के लिए पत्नी की इच्छा की जाती है, वह उद्देश्य तुमने मेरे द्वारा प्राप्त किया है। मेरे गर्भ से तुम्हारे द्वारा एक पुत्री और एक पुत्र उत्पन्न हुए हैं। इस प्रकार तुमने मेरा ऋण भी चुका दिया है। ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.157.7 
यदर्थमिष्यते भार्या प्राप्त: सोऽर्थस्त्वया मयि।
कन्या चैका कुमारश्च कृताहमनृणा त्वया॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जिस उद्देश्य के लिए पत्नी की इच्छा की जाती है, वह उद्देश्य तुमने मेरे द्वारा प्राप्त किया है। मेरे गर्भ से तुम्हारे द्वारा एक पुत्री और एक पुत्र उत्पन्न हुए हैं। इस प्रकार तुमने मेरा ऋण भी चुका दिया है। ॥7॥
 
The purpose for which a wife is desired, you have achieved that purpose through me. A daughter and a son have been born from my womb by you. In this way you have also repaid my debt. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)