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mahabharat 1.157.37: इन सब बातों पर विचार करके और अपने शरीर के त्याग को निन्दनीय समझकर तुम शीघ्र ही अपने आपको, अपने परिवार को तथा इन दोनों बालकों को इस विपत्ति से बचा लो ॥ 37॥   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.157.37 
एतत् सर्वं समीक्ष्य त्वमात्मत्यागं च गर्हितम्।
आत्मानं तारयाद्याशु कुलं चेमौ च दारकौ॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
इन सब बातों पर विचार करके और अपने शरीर के त्याग को निन्दनीय समझकर तुम शीघ्र ही अपने आपको, अपने परिवार को तथा इन दोनों बालकों को इस विपत्ति से बचा लो ॥ 37॥
 
Having pondered over all these matters and considering the renunciation of your body a condemnable act, you should quickly save yourself, your family and these two children from this calamity. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)