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mahabharat 1.157.36: हे शुभ हृदय! अनेक स्त्रियों से विवाह करने वाले पुरुष भी पाप नहीं करते। किन्तु स्त्रियाँ यदि अपने पूर्व पतियों का अपमान करती हैं, तो वे घोर पाप करती हैं। 36.   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.157.36 
न चाप्यधर्म: कल्याण बहुपत्नीकृतां नृणाम्।
स्त्रीणामधर्म: सुमहान् भर्तु: पूर्वस्य लङ्घने॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे शुभ हृदय! अनेक स्त्रियों से विवाह करने वाले पुरुष भी पाप नहीं करते। किन्तु स्त्रियाँ यदि अपने पूर्व पतियों का अपमान करती हैं, तो वे घोर पाप करती हैं। 36.
 
O auspicious one of the hearts! Even men who marry many women do not commit any sin. But women commit a grave sin if they violate their previous husbands. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)