श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.157.34 
जातपुत्रा च वृद्धा च प्रियकामा च ते सदा।
समीक्ष्यैतदहं सर्वं व्यवसायं करोम्यत:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
मैं पुत्र को जन्म दे चुकी हूँ, वृद्ध हो चुकी हूँ और सदैव आपकी प्रसन्नता की कामना करती रही हूँ। इन सब बातों पर विचार करके अब मैंने प्राण त्यागने का निश्चय कर लिया है ॥ 34॥
 
I have given birth to a son, I have grown old and I have always desired to please you. Having considered all these matters, I have now decided to die. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)