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mahabharat 1.157.32: यदि पुरुष वहाँ जाएँ, तो राक्षस उन्हें मार डालेगा, इसमें संदेह नहीं है; किन्तु स्त्रियों को मारने में संदेह है। (यदि राक्षस धर्म का विचार करेगा, तो मेरे बचने की आशा है) अतः हे धर्म को जानने वाले आर्यपुत्र, आप मुझे वहाँ भेज दें। 32.   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.157.32 
निस्संशयं वध: पुंसां स्त्रीणां संशयितो वध:।
अतो मामेव धर्मज्ञ प्रस्थापयितुमर्हसि॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
यदि पुरुष वहाँ जाएँ, तो राक्षस उन्हें मार डालेगा, इसमें संदेह नहीं है; किन्तु स्त्रियों को मारने में संदेह है। (यदि राक्षस धर्म का विचार करेगा, तो मेरे बचने की आशा है) अतः हे धर्म को जानने वाले आर्यपुत्र, आप मुझे वहाँ भेज दें। 32.
 
If men go there, there is no doubt that the demon will kill them; but there is doubt about killing women. (If the demon thinks about Dharma, there is a hope of my survival) Therefore, O Aryaputra, who knows Dharma, you should send me there. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)