Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.157.31: धर्म के निर्णय के विषय में धर्मज्ञ विद्वानों ने स्त्रियों को अग्राह्य बताया है। लोग राक्षसों को भी धार्मिक कहते हैं। अतः सम्भव है कि वे राक्षस भी मुझे स्त्री समझकर न मार डालें। 31॥ | mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अवध्यां स्त्रियमित्याहुर्धर्मज्ञा धर्मनिश्चये।
धर्मज्ञान् राक्षसानाहुर्न हन्यात् स च मामपि॥ ३१॥
अनुवाद
धर्म के निर्णय के विषय में धर्मज्ञ विद्वानों ने स्त्रियों को अग्राह्य बताया है। लोग राक्षसों को भी धार्मिक कहते हैं। अतः सम्भव है कि वे राक्षस भी मुझे स्त्री समझकर न मार डालें। 31॥
Religious scholars have described women as inadmissible in the matter of deciding religion. People also call demons religious. Therefore, it is possible that even that demon may not kill me considering me to be a woman. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥