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mahabharat 1.157.28: स्त्री, पुत्र, धन और घर - ये सब वस्तुएँ दृश्य और अदृश्य फल (सांसारिक और पारलौकिक लाभ) के लिए संग्रह करने योग्य हैं। ऐसा विद्वानों का मत है॥28॥   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.157.28 
दृष्टादृष्टफलार्थं हि भार्या पुत्रो धनं गृहम्।
सर्वमेतद् विधातव्यं बुधानामेष निश्चय:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
स्त्री, पुत्र, धन और घर - ये सब वस्तुएँ दृश्य और अदृश्य फल (सांसारिक और पारलौकिक लाभ) के लिए संग्रह करने योग्य हैं। ऐसा विद्वानों का मत है॥28॥
 
Wife, son, wealth and house - all these things are to be collected for visible and invisible fruits (worldly and spiritual benefits). This is the opinion of the learned.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)