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mahabharat 1.157.21: नाथ! इस प्रकार आपके बिना मैं और ये दोनों बालक - हम तीनों ही पूर्णतः नष्ट हो जायेंगे - इसमें संशय नहीं है। अतः आप कृपा करके मेरा परित्याग कर दीजिये।   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.157.21 
त्रितयं सर्वथाप्येवं विनशिष्यत्यसंशयम्।
त्वया विहीनं तस्मात् त्वं मां परित्यक्तुमर्हसि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
नाथ! इस प्रकार आपके बिना मैं और ये दोनों बालक - हम तीनों ही पूर्णतः नष्ट हो जायेंगे - इसमें संशय नहीं है। अतः आप कृपा करके मेरा परित्याग कर दीजिये।
 
Nath! In this way, without you, I and these two children – all three of us will be completely destroyed – there is no doubt about it. Therefore, please just abandon me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)