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mahabharat 1.157.20: जैसे जल सूख जाने पर मछलियाँ नष्ट हो जाती हैं, उसी प्रकार तुम्हारे ये दोनों पुत्र भी, यदि तुम और मुझसे रहित हो जाएँ, तो अवश्य ही नष्ट हो जाएँगे॥20॥   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.157.20 
तौ च हीनौ मया बालौ त्वया चैव तथाऽऽत्मजौ।
विनश्येतां न संदेहो मत्स्याविव जलक्षये॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जैसे जल सूख जाने पर मछलियाँ नष्ट हो जाती हैं, उसी प्रकार तुम्हारे ये दोनों पुत्र भी, यदि तुम और मुझसे रहित हो जाएँ, तो अवश्य ही नष्ट हो जाएँगे॥20॥
 
Just as the fishes get destroyed when the water dries up, in the same way these two children of yours will surely get destroyed if they are deprived of you and me. ॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)