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mahabharat 1.157.17: यदि मैं अपनी आपके उत्तम गुणों से युक्त पुत्री को उन अयोग्य पुरुषों के हाथ में देने से इन्कार कर दूँ, तो वे उसे बलपूर्वक ले जाएँगे, जैसे कौए यज्ञ का भाग लेकर उड़ जाते हैं ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.157.17 
तां चेदहं न दित्सेयं त्वद्‍गुणैरुपबृंहिताम्।
प्रमथ्यैनां हरेयुस्ते हविर्ध्वाङ्क्षा इवाध्वरात्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं अपनी आपके उत्तम गुणों से युक्त पुत्री को उन अयोग्य पुरुषों के हाथ में देने से इन्कार कर दूँ, तो वे उसे बलपूर्वक ले जाएँगे, जैसे कौए यज्ञ का भाग लेकर उड़ जाते हैं ॥17॥
 
If I refuse to give my daughter, endowed with your excellent qualities, into the hands of those unworthy men, they will forcibly take her away, just as crows fly away after taking the portion of the sacrificial offerings. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)