श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.157.16 
इमामपि च ते बालामनाथां परिभूय माम्।
अनर्हा: प्रार्थयिष्यन्ति शूद्रा वेदश्रुतिं यथा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जैसे अयोग्य शूद्र वेदों की श्रुति प्राप्त करना चाहता है, वैसे ही अयोग्य मनुष्य मेरी उपेक्षा करके तुम्हारी इस अनाथ कन्या को अपनाना चाहेगा ॥16॥
 
Just as an unworthy Shudra wants to obtain the Shruti of the Vedas, similarly an unworthy man will ignore me and want to adopt this orphan girl of yours. ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)