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mahabharat 1.157.14: मैं आपके कुल की इस एकमात्र अबोध बालिका को उसके पूर्वजों द्वारा पोषित धर्म के मार्ग पर कैसे रख पाऊँगा? ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.157.14 
कथं तव कुलस्यैकामिमां बालामनागसम्।
पितृपैतामहे मार्गे नियोक्तुमहमुत्सहे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मैं आपके कुल की इस एकमात्र अबोध बालिका को उसके पूर्वजों द्वारा पोषित धर्म के मार्ग पर कैसे रख पाऊँगा? ॥14॥
 
How will I be able to keep this only innocent girl of your family on the path of religion nurtured by her forefathers? ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)