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mahabharat 1.157.12-13: जैसे पक्षी भूमि पर फेंके गए मांस के टुकड़े पर झपट पड़ते हैं, वैसे ही विधवा को सब लोग लुभाना चाहते हैं। हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! जब दुष्ट लोग बार-बार मुझसे विनती करके मुझे अपनी मर्यादा से विचलित करने का प्रयत्न करेंगे, तब मैं सज्जन पुरुषों द्वारा इच्छित मार्ग पर दृढ़ नहीं रह सकूँगा।॥12-13॥   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  1.157.12-13 
उत्सृष्टमामिषं भूमौ प्रार्थयन्ति यथा खगा:।
प्रार्थयन्ति जना: सर्वे पतिहीनां तथा स्त्रियम्॥ १२॥
साहं विचाल्यमाना वै प्रार्थ्यमाना दुरात्मभि:।
स्थातुं पथि न शक्ष्यामि सज्जनेष्टे द्विजोत्तम॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जैसे पक्षी भूमि पर फेंके गए मांस के टुकड़े पर झपट पड़ते हैं, वैसे ही विधवा को सब लोग लुभाना चाहते हैं। हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! जब दुष्ट लोग बार-बार मुझसे विनती करके मुझे अपनी मर्यादा से विचलित करने का प्रयत्न करेंगे, तब मैं सज्जन पुरुषों द्वारा इच्छित मार्ग पर दृढ़ नहीं रह सकूँगा।॥12-13॥
 
Just as birds pounce on a piece of meat thrown on the ground, similarly everyone wants to woo a widow. O best of Brahmins! When wicked people will repeatedly try to make me deviate from my limits by pleading with me, then I will not be able to remain steadfast on the path desired by the noble men.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)