Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.157.11: जब ऐसे अभिमानी और अभिमानी लोग, जो तुम्हारे साथ सम्बन्ध रखने के सर्वथा अयोग्य हैं, मुझसे इस कन्या को मांगेंगे, तब मैं उनसे इसकी रक्षा कैसे कर सकूंगा? ॥11॥ | mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अहंकृतावलिप्तैश्च प्रार्थ्यमानामिमां सुताम्।
अयुक्तैस्तव सम्बन्धे कथं शक्ष्यामि रक्षितुम्॥ ११॥
अनुवाद
जब ऐसे अभिमानी और अभिमानी लोग, जो तुम्हारे साथ सम्बन्ध रखने के सर्वथा अयोग्य हैं, मुझसे इस कन्या को मांगेंगे, तब मैं उनसे इसकी रक्षा कैसे कर सकूंगा? ॥11॥
When such arrogant and proud people, who are totally unworthy of having relations with you, will ask for this girl from me, then how will I be able to protect her from them? ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥