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mahabharat 1.156.40: विद्वानों ने कहा है कि इनमें से किसी का भी त्याग करना क्रूर और निन्दनीय होगा और यदि मैं मर जाऊँगा तो ये सब मेरे बिना ही मर जाएँगे ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.156.40 
एषां चान्यतमत्यागो नृशंसो गर्हितो बुधै:।
आत्मत्यागे कृते चेमे मरिष्यन्ति मया विना॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
विद्वानों ने कहा है कि इनमें से किसी का भी त्याग करना क्रूर और निन्दनीय होगा और यदि मैं मर जाऊँगा तो ये सब मेरे बिना ही मर जाएँगे ॥40॥
 
The learned have said that abandoning any of these would be cruel and condemnable, and if I die, all of them will die without me. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)