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mahabharat 1.156.37: कुछ लोग मानते हैं कि पिता को अपने पुत्र से अधिक स्नेह होता है और कुछ लोग कहते हैं कि पिता को अपनी पुत्री से अधिक स्नेह होता है; परन्तु मेरे लिए दोनों एक ही हैं ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.156.37 
मन्यन्ते केचिदधिकं स्नेहं पुत्रे पितुर्नरा:।
कन्यायां केचिदपरे मम तुल्यावुभौ स्मृतौ॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग मानते हैं कि पिता को अपने पुत्र से अधिक स्नेह होता है और कुछ लोग कहते हैं कि पिता को अपनी पुत्री से अधिक स्नेह होता है; परन्तु मेरे लिए दोनों एक ही हैं ॥37॥
 
Some people believe that a father has more affection for his son and some others say that he has more affection for his daughter; but for me both are the same. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)