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mahabharat 1.156.27: हे मूर्ख! मैं बार-बार तुझसे अन्यत्र जाने का अनुरोध करता था। तब तू कहता था, 'मैं यहीं पैदा हुआ, यहीं पला-बढ़ा और मेरे पिता भी यहीं रहे।'॥27॥   |   mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.156.27 
इह जाता विवृद्धास्मि पिता चापि ममेति वै।
उक्तवत्यसि दुर्मेधे याच्यमाना मयासकृत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे मूर्ख! मैं बार-बार तुझसे अन्यत्र जाने का अनुरोध करता था। तब तू कहता था, 'मैं यहीं पैदा हुआ, यहीं पला-बढ़ा और मेरे पिता भी यहीं रहे।'॥27॥
 
Foolish one! I would repeatedly request you to go somewhere else. At that time you would say, 'I was born here, I grew up here and my father also lived here.'॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)