Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.156.23: कुछ लोग कहते हैं कि मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थों में मोक्ष ही सर्वश्रेष्ठ है, परन्तु मेरे लिए वह भी सरल नहीं है। धन प्राप्ति के पश्चात् नरक के सम्पूर्ण कष्ट भोगने पड़ते हैं॥ 23॥ | mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आहु: केचित् परं मोक्षं स च नास्ति कथंचन।
अर्थप्राप्तौ तु नरक: कृत्स्न एवोपपद्यते॥ २३॥
अनुवाद
कुछ लोग कहते हैं कि मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थों में मोक्ष ही सर्वश्रेष्ठ है, परन्तु मेरे लिए वह भी सरल नहीं है। धन प्राप्ति के पश्चात् नरक के सम्पूर्ण कष्ट भोगने पड़ते हैं॥ 23॥
Some people say that among the four aims of human life, salvation is the best, but even that is not easy for me. After attaining wealth, one has to undergo the full sufferings of hell.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥