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mahabharat 1.156.21: जीने में बड़ा दुःख है। जीवन में बड़ी-बड़ी चिंताओं का सामना करना पड़ता है। जिसने जीवन को अपना लिया है, उसे दुःख अवश्य ही प्राप्त होता है ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.156.21 
जीविते परमं दु:खं जीविते परमो ज्वर:।
जीविते वर्तमानस्य दु:खानामागमो ध्रुव:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जीने में बड़ा दुःख है। जीवन में बड़ी-बड़ी चिंताओं का सामना करना पड़ता है। जिसने जीवन को अपना लिया है, उसे दुःख अवश्य ही प्राप्त होता है ॥21॥
 
There is great sorrow in living. One has to face great worries during life. One who has embraced life, he surely experiences sorrow. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)