Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.156.20: ब्राह्मण देवता कह रहे थे - इस संसार जीवन को धिक्कार है क्योंकि यह अर्थहीन, व्यर्थ, दुःख का मूल, पराधीन और अत्यंत अप्रियता का भागी है।   |   mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.156.20 
ब्राह्मण उवाच
धिगिदं जीवितं लोके गतसारमनर्थकम्।
दु:खमूलं पराधीनं भृशमप्रियभागि च॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण देवता कह रहे थे - इस संसार जीवन को धिक्कार है क्योंकि यह अर्थहीन, व्यर्थ, दुःख का मूल, पराधीन और अत्यंत अप्रियता का भागी है।
 
The Brahmin god was saying - Shame on this life of the world because it is meaningless, futile, the root of sorrow, dependent and a part of extreme unpleasantness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)