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mahabharat 1.156.2: वैशम्पायनजी बोले - राजन्! महारथी कुन्तीपुत्र एकचक्रा नगरी में जाकर एक ब्राह्मण के घर कुछ दिनों तक रहे॥2॥   |   mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.156.2 
वैशम्पायन उवाच
एकचक्रां गतास्ते तु कुन्तीपुत्रा महारथा:।
ऊषुर्नातिचिरं कालं ब्राह्मणस्य निवेशने॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले - राजन्! महारथी कुन्तीपुत्र एकचक्रा नगरी में जाकर एक ब्राह्मण के घर कुछ दिनों तक रहे॥2॥
 
Vaishampayanji said – King! Maharathi Kunti's son went to Ekachakra city and stayed in the house of a Brahmin for a few days. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)