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mahabharat 1.156.18: तदनन्तर कुन्तीदेवी उसी प्रकार उस श्रेष्ठ ब्राह्मण के अन्तःकक्ष में प्रविष्ट हो गईं, जैसे गाय अपने बछड़े सहित अपने घर में प्रवेश करती है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.156.18 
अन्त:पुरं ततस्तस्य ब्राह्मणस्य महात्मन:।
विवेश त्वरिता कुन्ती बद्धवत्सेव सौरभी॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर कुन्तीदेवी उसी प्रकार उस श्रेष्ठ ब्राह्मण के अन्तःकक्ष में प्रविष्ट हो गईं, जैसे गाय अपने बछड़े सहित अपने घर में प्रवेश करती है॥18॥
 
Then Kuntidevi immediately entered the inner chamber of that great Brahmin just as a cow with her calf reaches her home by itself.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)