Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.156.17: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! जब माता-पिता और पुत्र इस प्रकार बातें कर रहे थे, तब पुनः ब्राह्मण और उसकी पत्नी का विलापपूर्ण आर्तनाद उनके कानों में पड़ा। | mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
एवं तौ कथयन्तौ च भूय: शुश्रुवतु: स्वनम्।
आर्तिजं तस्य विप्रस्य सभार्यस्य विशाम्पते॥ १७॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! जब माता-पिता और पुत्र इस प्रकार बातें कर रहे थे, तब पुनः ब्राह्मण और उसकी पत्नी का विलापपूर्ण आर्तनाद उनके कानों में पड़ा।
Vaishmpayana says - O King! While the mother and son were talking in this manner, once again the wailing cries of the Brahmin along with his wife reached their ears. 17.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥