Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.155.7-8: तब व्यासजी बोले, "भरतश्रेष्ठ पाण्डुपुत्रों! तुम पर जो विपत्ति आने वाली थी, उसे मैंने पहले ही देख लिया था। यह जानते हुए कि धृतराष्ट्र के पुत्रों ने अन्यायपूर्वक तुम्हें राज्य से निकाल दिया है, मैं तुम्हारा परम हित करने के लिए यहाँ आया हूँ। तुम्हें इस बात से दुःखी नहीं होना चाहिए; यह सब तुम्हारे भावी सुख के लिए हो रहा है।" 7-8 | mahabharat अध्याय 1.155: पाण्डवोंको व्यासजीका दर्शन और उनका एकचक्रा नगरीमें प्रवेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब व्यासजी बोले, "भरतश्रेष्ठ पाण्डुपुत्रों! तुम पर जो विपत्ति आने वाली थी, उसे मैंने पहले ही देख लिया था। यह जानते हुए कि धृतराष्ट्र के पुत्रों ने अन्यायपूर्वक तुम्हें राज्य से निकाल दिया है, मैं तुम्हारा परम हित करने के लिए यहाँ आया हूँ। तुम्हें इस बात से दुःखी नहीं होना चाहिए; यह सब तुम्हारे भावी सुख के लिए हो रहा है।" 7-8
Then Vyasa said, "Best of Bharatas, sons of Pandu! I had already foreseen the trouble that had befallen you. Knowing how Dhritarashtra's sons have unjustly expelled you from the kingdom, I have come here to do your utmost good. You should not be sad about this; all this is happening for your future happiness. 7-8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥