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mahabharat 1.155.19: महाराज! उस समय सबने हाथ जोड़कर उनकी आज्ञा स्वीकार की। तत्पश्चात् महाबली भगवान व्यास जिस मार्ग से आये थे, उसी मार्ग से चले गये।   |   mahabharat अध्याय 1.155: पाण्डवोंको व्यासजीका दर्शन और उनका एकचक्रा नगरीमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 155: पाण्डवोंको व्यासजीका दर्शन और उनका एकचक्रा नगरीमें प्रवेश  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.155.19 
स तै: प्राञ्जलिभि: सर्वैस्तथेत्युक्तो नराधिप।
जगाम भगवान् व्यासो यथागतमृषि: प्रभु:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय सबने हाथ जोड़कर उनकी आज्ञा स्वीकार की। तत्पश्चात् महाबली भगवान व्यास जिस मार्ग से आये थे, उसी मार्ग से चले गये।
 
King! At that time everyone accepted his orders with folded hands. Thereafter the powerful sage Bhagwan Vyasa left the same way he had come.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि हिडिम्बवधपर्वणि एकचक्राप्रवेशे व्यासदर्शने पञ्चपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत हिडिम्बवधपर्वमें पाण्डवोंका एकचक्रानगरीमें प्रवेश और व्यासजीका दर्शनविषयक एक सौ पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)