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mahabharat 1.155.18: तुम सब लोग एक महीने तक यहीं मेरी प्रतीक्षा करो। मैं फिर आऊँगा। स्थान और समय का विचार करके ही कोई कार्य करना चाहिए; इससे तुम्हें महान सुख मिलेगा।॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.155: पाण्डवोंको व्यासजीका दर्शन और उनका एकचक्रा नगरीमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 155: पाण्डवोंको व्यासजीका दर्शन और उनका एकचक्रा नगरीमें प्रवेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.155.18 
इह मासं प्रतीक्षध्वमागमिष्याम्यहं पुन:।
देशकालौ विदित्वैव लप्स्यध्वं परमां मुदम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तुम सब लोग एक महीने तक यहीं मेरी प्रतीक्षा करो। मैं फिर आऊँगा। स्थान और समय का विचार करके ही कोई कार्य करना चाहिए; इससे तुम्हें महान सुख मिलेगा।॥18॥
 
‘You all wait for me here for a month. I will come again. One should do any work after considering the place and time; this will give you great happiness.'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)