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mahabharat 1.155.14: आपके और माद्री के सभी पराक्रमी पुत्र सदैव अपने राज्य में सुखपूर्वक विचरण करेंगे ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 1.155: पाण्डवोंको व्यासजीका दर्शन और उनका एकचक्रा नगरीमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 155: पाण्डवोंको व्यासजीका दर्शन और उनका एकचक्रा नगरीमें प्रवेश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.155.14 
पुत्रास्तव च माद्रॺाश्च सर्व एव महारथा:।
स्वराष्ट्रे विहरिष्यन्ति सुखं सुमनस: सदा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
आपके और माद्री के सभी पराक्रमी पुत्र सदैव अपने राज्य में सुखपूर्वक विचरण करेंगे ॥14॥
 
All your and Madri's mighty sons will always roam around happily in their kingdom. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)